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Frequently asked questions ::ICAR-Vivekananda Parvatiya Krishi Anusandhan Sansthan

Frequently asked questions

पर्वतीय क्षेत्रों के कृषकों की समस्याऐं एवं समाधान

प्र0: संस्थान द्वारा विकसित टमाटर व शिमला मिर्च की कौन सी प्रजातियाँ पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं ?
उ0: संस्थान द्वारा विकसित टमाटर की प्रजाति वी.एल टमाटर 4 एवं शिमला मिर्च की प्रजाति वी.एल शिमला मिर्च 3 उत्तराखण्ड के पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। वी.एल टमाटर 4 के पौधे अनिश्चित बढ़वार वाले, 80 से 105 सेमी. लम्बे, फल-लाल, गोलाकार औसतन 75 ग्राम मोटे छिलके युक्त होते हैं। यह प्रजाति पाली हाउस के लिए भी अति उत्तम प्रजाति है। इस प्रजाति की सबसे अच्छी बात यह है कि मुक्त परागित होने के कारण इसका बीज कृषक स्वयं बना सकते हैं। वी.एल शिमला मिर्च 3 के पौधे छोटे आकार के 55-70 सेमी. लम्बे होते हैं। फल मध्यम आकार (60-70 ग्राम), 3 से 4 लोब युक्त आकर्षक गहरे हरे रंग के होते हैं।

 

प्र0: गेहूँ की फसल में आने वाला प्रमुख रोग "पीला रतुआ" एवं "भूरा रतुआ" का नियंत्रण कैसे करें ?
उ0: रोग रोधी किस्मों का प्रयोग करें। वी.एल. गेहूँ 907, वी.एल. गेहूँ 953, वी.एल. गेहूँ 892, वी.एल. गेहूँ 829, वी.एल. 804, एच.एस.डब्ल्यू. 349 व एच.एस. 507 अनुमोदित प्रजातियाँ हैं। रसायनों द्वारा रोकथाम हेतु प्रोपिकोनाज़ोल 25 ई.सी. का 0.1 प्रतिशत का घोल बनाकर रोग के लक्षण दिखाई देने पर छिड़काव करें।


प्र0: टमाटर व शिमला मिर्च की फसल को प्रभावित करने वाली सफेद मक्खी का नियंत्रण कैसे करें ?
उ0: टमाटर व शिमला मिर्च के खेत में चिपचिपे पीले ट्रैप लगाएं। रासायनिक नियंत्रण हेतु एसिटामिप्रिड (20 एस.पी.) 0.3 ग्राम या ट्राइएज़ोफॉस (40 ई.सी.) की 1.0 मिली. प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।

 

प्र0: टमाटर में अगेती झुलसा रोग के लक्षण क्या हैं और इसका कैसे नियंत्रण करें ?
उ0: पत्तियों में गोल या अण्डाकार भूरे से काले रंग के धब्बे, पत्तियों का सड़ना व मुरझाना टमाटर में अगेती झुलसा रोग के लक्षण हैं। नियंत्रण हेतु मैंकोजे़ब की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से 3-4 बार छिड़काव करें। रोगी पौधों के अवशेषों को नष्ट कर दें।

 

प्र0: कुरमुला कीटों के नियंत्रण हेतु उपाय बताऐं।
उ0: कुरमुला कीटों के नियंत्रण हेतु संस्थान द्वारा द्विआयामी प्रौद्योगिकी का विकास किया गया है।

  •  वी.एल. कुरमुला ट्रैप-1 प्रकाश प्रपंच का सामुदायिक रूप से पूरे गाँव में उचित स्थानों पर प्रयोग करें।
  •  जैव कीटनाशी "बैसिलस सिरियस डब्लू. जी. पी. एस. बी-2" का उपयोग (10 किग्रा पाउडर/हैक्टैयर) की दर से करें।

 

प्र0: टमाटर की फसल में पछेती झुलसा के लक्षण क्या हैं और इसका नियंत्रण कैसे करें ?
उ0: टमाटर की फसल में पछेती झुलसा के आने पर पत्तियों की निचली सतह पर भूरे-बैंगनी रंग के धब्बे बनते हैं जो बाद में काले पड़ जाते हैं। पौधे झुलसे हुए दिखाई देते हैं। फलों में जैतूनी रंग के चिकनाई लिए हुए धब्बे बनते हैं तथा छिलका फट जाता है। अधिक प्रकोप होने पर फल सड़ जाता है। टमाटर की फसल में पछेती झुलसा के नियंत्रण हेतु रोगी पौधों को जला दें। लक्षण दिखने पर मैंकोजेब 2.5 ग्राम या कॉपरऑक्सीक्लोराइड 3.0 ग्राम या करजेट (curzate)  1 मिली. प्रति लीटर पानी की दर से जरुरत अनुसार 3-4 छिड़काव 10-15 दिन के अन्तराल पर दवा बदल-बदल कर पत्तियों के दोनों तरफ व पूरे पौधों पर करना चाहिए।

 

प्र0: पर्वतीय क्षेत्रों हेतु संस्थान द्वारा विकसित कौन कौन सी मशीनें एवं कृषि उपकरण हैं ?
उ0:  संस्थान द्वारा विकसित कृषि उपकरणों की सूची निम्नवत है:-

  •  वी.एल. सीड-कम-फर्टी ड्रिल
  •  वी.एल. उन्नत हैण्ड फार्क
  • वी.एल. उन्नत कुटला
  •  वी.एल. उन्नत दराती
  •  वी.एल. उन्नत खुरपी
  •  वी.एल. उन्नत गार्डन रैक
  • वी.एल. उन्नत हैण्ड हो
  •  वी एल लाईन मेकर
  •  वी एल पैडी थ्रैशर
  •  विवेक मंडुवा/मादिरा थ्रैशर-कम-पर्लर
  •  वी एल स्याही हल

 

प्र0: संस्थान में किसान मेले का आयोजन कब कराया जाता है ?
उ0: संस्थान द्वारा वर्ष मे दो बार किसान मेले का आयोजन किया जाता है। रबी किसान मेला प्रायः सितम्बर में एवं खरीफ किसान मेला मार्च-अप्रैल माह में आयोजित किया जाता है।

 

प्र0: संस्थान में कृषि संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए किस प्रकार आवेदन किया जा सकताहै ?
उ0:
सरकार द्वारा चलाई जा रही कृषि विकास की विभिन्न परियोजनाओं के अन्तर्गत कृषकों के प्रशिक्षण हेतु बजट का प्रावधान होता है। इन परियोजनाओं का संचालन जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा किया जाता है। इसके लिए कृषक बन्धु मुख्य कृषि अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, उप-परियोजना निदेशक (जलागम प्रबन्धन) आदि से सम्पर्क कर सकते हैं। अनेक स्वयं सेवी संस्थाएँ भी कृषक प्रशिक्षण कराती हैं अतः कृषक अपने क्षेत्र में कार्य कर रहीं स्वयं सेवी संस्थाओं से भी सम्पर्क कर सकते हैं।

 

Page Last Updated On : 25-07-2017