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  • कृषि विज्ञान केन्द्र, चिन्यालीसौड़ में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन

    चिन्यालीसौड़ - 6 अक्टूबरए 2018- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि विज्ञान केन्द्र, चिन्यालीसौड़ की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गयी। बैठक की अध्यक्षता डा. अरूणव पट्टनायक , निदेशक, भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा ने की। बैठक में प्रभारी अधिकारी डा. पंकज नौटियाल ने सभी सम्मानित सदस्यों का स्वागत किया। बैठक में डा. पंकज नौटियाल ने  वर्ष 2017-18 की प्रगति समीक्षा प्रस्तुत की। जिसमें उन्होंने बताया कि केन्द्र द्वारा गत वर्ष कुल 65 प्रशिक्षणों का आयोजन किया गया जिसमें 1672 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। इसके अलावा केन्द्र ने वर्ष 2017-18 में 44.5 हे. भूमि पर विभिन्न फसलों के 750 प्रदर्शन आयोजित किये गये। इसके अलावा केन्द्र में स्थानीय परिस्थितियों पर परीक्षण करने व स्थान विशेष आधारित तकनीकें विकसित करने हेतु 7 अनुकरणीय परीक्षणों का आयोजन किया गया। केन्द ने 1099 अन्य प्रसार कार्यक्रमों के माध्यम से 14690 कृषकों को लाभ पहुंचाया। जिसमें किसान गोष्ठी, किसान मेला, प्रक्षेत्र दिवसए फिल्म शो जैसे कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गयां। केन्द्र पर बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत 29.80 क्विंटल उन्नत प्रजातियेां के बीज एवं 96925 सब्जी पौध का उत्पादन कर जिले के उन्नत प्रजातियों के बीज एवं पौध उपलब्ध करायी। डा. नौटियाल ने आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 हेतु प्रस्तावित कार्य योजना को समिति के सामने अनुमोदन हेतु रखा जिनमें 123 प्रशिक्षण, 52.0 हे. में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन व 07 अनुकरणीय परीक्षण, 262 प्रसार कार्यक्रम, 48.6 क्विंटल बीज उत्पादन, 1,50,000 पौध काउत्पादन व अन्य आधारभूत कार्यक्रम प्रमुख हैं।

    बैठक की अध्यक्षता करते हुए डा. अरूणव पट्टनायक, निदेशक, भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा ने बैठक में आए सभी विशिष्ट अतिथियों के सुझावों का स्वागत करते हुए अनुमोदन किया कि कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा समय समय पर कृषकों को तकनीकी प्रदर्शनए उच्च गुणवत्ता  वाले बीज एवं पौध एवं कृषकों की समस्या का निवारण किया जाता रहा है एवं केंद्र आगे भी कृषको को लाभान्वित करते रहेगा। उन्होंने कहा कि भूमि एवं जल सरक्षण की तकनीकों (एल डी पी ई टैंक, कन्टूर बन्डिगए छत जल संचयन इत्यादि) एवं मृदा उर्वरा प्रबन्धन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता हैं । उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में खाली पड़ी भूमि को बागबानी के माध्यम से व्यवसाय परक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय विभागों एवं कृषि विज्ञान केन्द्र की गतिविधियों का किसानो की आय दोगुनी करने में समन्वय हो अत्यंत आवश्यक है।

    बैठक में विशिष्ट अतिथि डा. एस. के. गुप्ता, अधिष्ठाता वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी ने प्रगतिशील कृषकों को सुझाव दिया कि वे केंद्र द्वारा लगाये गए आम का सघन वृक्षारोपण के प्रदर्शन को देखकर उसे अपने क्षेत्र में अपनाने का प्रयास करें एवं इसे अपनाकर अपनी आमदनी दुगनी करे। श्री जी. एस. चौधरी ए. जी. एम. नाबार्ड ने भी केंद्र की सराहना करते हुए कहा कि आज के परिपेक्ष में युवा कृषकों को खेती से संबंधित नवीन जानकारियों को अपने माध्यम से प्रसारित करें, जिससे कि कृषि को पर्वतीय क्षेत्रों में व्यवसाय के रूप में अपनाया जा सके। उन्होंने कहा कि उद्यान फसलों को लगाने से धनोपार्जन के साथ-साथ पर्यावरण का संरक्षण भी होता है। इसी क्रम में डॉ प्रलयंकरनाथ, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी उत्तरकाशी, श्री बृजराज सिंह, मुख्य उद्यान अधिकारी, श्री सोहन सिंह राणा, खंड विकास अधिकारी, श्री. प्रमोद कुमार शुक्ल, सहायक निदेशक मत्स्य, डा. आलोक येवले, प्रभारी अधिकारीए कृषि विज्ञान केन्द्र रानीचौरी ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

    प्रगतिशील कृषक श्री जीत सिंह राणा ने भी अपने संबोधन में कहा की केन्द्र अपने वैज्ञानिकों द्वारा जिले के किसानों के लिए अच्छा कार्य कर रहा है। कार्यक्रम के अंत में डा गौरव पपनै ने कृषकों को नयी सूचना तकनीक से जोड़ते हुए "केवीके सन्देश एपश"  से अवगत कराया और सभी अधिकारियों से आह्वाहन किया कि जिले के प्रत्येक किसान को इस एप से जोड़ा जाए एवं सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के दो प्रकाशनों  "विवेकानंद प्रश्नोत्तरी" एवं "र्वतीय क्षेत्रों में आलू कि वैज्ञानिक खेती"  का भी विमोचन किया गया तथा वृक्षारोपण भी किया गया।