• भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा व कृषि विज्ञान केन्द्र में विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस का आयोजन

    भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र, हवालबाग में दिनांक 05.12.18 को विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डा. एम. वाई. ज़रगर, निदेशक (शोध), शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं तकनीकी विश्विद्यालय, श्रीनगर मुख्य अतिथि एवं डा. एस. पी. शर्मा, पूर्व निदेशक (शोध), सी.एस.के.एच.पी.के.वी.वी., पालमपुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में मुख्य अतिथि ने संस्थान द्वारा पर्वतीय कृषि के विभिन्न पहलुओं पर किए जा रहे शोध कार्यों की प्रशंसा करते हुए  कहा कि प्रदेश के विकास हेतु किसानों का आर्थिक रूप से मजबूत होना अत्यन्त आवश्यक है । वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी किये जाने के लक्ष्य पर जोर देते हुए उन्होंने विकसित तकनीकियों को किसानों तक ले जाने हेतु संस्थान की सराहना की। तत्पश्चात् विशिष्ट अतिथि डा. शर्मा ने महिलाओं द्वारा कृषि में दिए जा रहे योगदान हेतु उन्हें बधाई दी । उन्होंने कहा कि यह वसुन्धरा अनेक रत्नों से परिपूर्ण है । सभी देशवासियों का यह दायित्व है कि इस धरती की उर्वरता को बनाये रखें । इस दिशा में संस्थान द्वारा किए जा रहे कृषकों के खेत की मृदा परीक्षण की सराहना करते हुए उन्होंने सभी कृषकों से आह्वान किया कि वे फसल बुवाई से पूर्व मिट्टी की जाँच अवश्य करायें ताकि वे अच्छा फसल उत्पादन व आय प्राप्त कर सकें । 

    कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि द्वारा ग्राम शामा, जिला-बागेश्वर के किसानों को 193 मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए । इस अवसर पर संस्थान के कार्यकारी निदेशक डा. लक्ष्मी कान्त ने समस्त आगन्तुकों का स्वागत करते हुए मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने हेतु मृदा का परीक्षण होना अत्यन्त आवश्यक है। संस्तुत उर्वरकों के प्रयोग से मृदा के स्वास्थ्य को सुधार जा सकता है एवं मृदा परीक्षण उपरान्त ही कृषकों द्वारा खेत में पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग किया जाना चाहिए । डा. जे. के. बिष्ट, विभागाध्यक्ष फसल उत्पादन ने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा फरवरी 2015 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड का शुभारम्भ किया गया एवं अभी तक देश में लगभग 12 करोड़ लोगों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं। डा. निर्मल चन्द्रा, अनुभागाध्यक्ष सामाजिक विज्ञान ने कृषकों को संबोधित करते हुए मृदा स्वास्थ्य एवं टिकाऊ फसल उत्पादन पर बल दिया।इस अवसर पर भारत सरकार द्वारा बनाई गयी विश्व मृदा दिवस हेतु लघु फिल्म का भी प्रसारण किया गया। इस अवसर पर किसानों तथा मुख्य अतिथि के समक्ष मृदा परीक्षक किट का प्रदर्शन भी किया गया। साथ ही मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, कृषि उपयोगी लघु उपकरणों का प्रदर्शन एवं मृदा नमूना लेने की तकनीकी के बारे में विस्तार से बताया। 

     

    कृषि विज्ञान केन्द्र, चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी द्वारा 05 दिसम्बर, 2018 को विश्व मृदा दिवस एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. पंकज नौटियाल, प्रभारी अधिकारी, कृषि विज्ञान केन्द्र, चिन्यालीसौड़,  ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य एवं मिट्टी की जाँच के फायदे एवं उपयोग के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी। उन्होनें कहा कि मृदा में मुख्य एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलन को बनाये रखने से ही हमारे खेतों की उत्पादकता बढ़ सकती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक खादों के अन्धाधुन्ध प्रयोग न करने का आह्नवाहन भी किया।


    डॉ. गौरव पपनैं एवं कु. मनीषा आर्या विषय वस्तु विशेषज्ञों द्वारा किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड से जुड़ी जानकारियों एवं उसके आकलन के बारे में बताया गया तथा प्रत्येक किसान को मृदा परीक्षण करवाने एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड़ बनवाने का आह्नवाहन किया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री प्रशांत कुमार आर्या, मुख्य विकास अधिकारी, उत्तरकाशी ने, किसानो से कहा कि कृषि से संम्बन्धित जानकारियों को प्राप्त कर हमें उनका अनुपालन करना होगा तभी कृषि क्षेत्र में हम अग्रसर हो सकते है। उन्होंने किसानो से सीधा संवाद कर कहा कि समस्त किसानो को मृदा परीक्षण करवाना चाहिये तथा कृषि विज्ञान केन्द्र के सहयोग से उन्नत फसलों की  खेती करनी चाहिए।

    कार्यक्रम कि अध्यक्षता करते हुए माननीय नगर पालिका अध्यक्षा, श्रीमती बीना बिष्ट ने कृषि विज्ञान केन्द्र, चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी  द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों कि प्रशंसा की तथा किसानो को सन्देश दिया कि उन्हें इस केंद्र के विशेषज्ञों के सहयोग द्वारा वैज्ञानिक विधि से खेती करनी चाहिए। इस अवसर पर 114 मृदा स्वास्थ्य कार्ड कृषकों को वितरित किये गये। कार्यक्रम में प्रगतिशील कृषक श्री भरत सिंह राणा का सम्मान किया गया । इसके अलावा केंद्र द्वारा आयोजित भाषण प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया जिनमे कि बिरजा इंटर कॉलेज, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज और राजकीय इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया था। कार्यक्रम में डी.डी. एम.नाबार्ड श्री पी. सुनील मोहन कृष्णन, मुख्य उद्यान अधिकारी श्री बृजराज सिंह ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में जिले के 205 से अधिक कृषको ने प्रतिभागिता किया।

     

    कृषि विज्ञान केन्द्र, काफलीगैर में विश्व मृदा दिवस के अवसर पर रबी पूर्व किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ जिला पंचायत सदस्य श्री रवि करायत द्वारा किया गया। अन्य किसानों तथा ग्रामीण युवाओं का रूझान कृषि की तरफ बढ़ाने के उद्देश्य से कार्यक्रम में कृषकों द्वारा कृषक उत्पाद प्रर्दशनी भी लगायी गयी। कृषकों के लिये किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्यतः रबी फसलों की वैज्ञानिक खेती की जानकारी के साथ-साथ रासायनिक खादों के उचित उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड की उपयोगिता  के विषय में चर्चा की गयी। गोष्ठी के उपरान्त कृषकों के मध्य प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें विजेता किसानों को पुरूस्कृत भी किया गया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी अधिकारी डा. नवल किशोर सिंह ने मृदा जांच की आवश्यकता एवं महत्व के विषय में बताया साथ ही मृदा की उर्वरकता एवं फसल की उत्पादकता बनाये रखने के विषय में जानकारी प्रदान की। मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य श्री रवि करायत ने कृषि विज्ञान केन्द्र, काफलीगैर द्वारा कृषकों के हित में किये जा रहे कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में खरही मण्डल अध्यक्ष श्री बालम सिंह ने फसल के उत्पादन में मृदा के महत्व को बताया। गोष्ठी के दौरान कृषकों द्वारा पूछे गये प्रश्नों का निराकरण केन्द्र के विशेषज्ञों डा. नवल किशोर सिंह, डा. कमल कुमार पाण्डे, श्री हरीश चन्द्र जोशी तथा श्री मेदनी प्रताप सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम में कपकोट, गरूड़ तथा बागेश्वर ब्लाक के कुल 135 किसानों ने प्रतिभाग किया। कार्यम में 100 मृदा स्वास्थ्य कार्डों का वितरण किया गया।