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News & Event ::ICAR-Vivekananda Parvatiya Krishi Anusandhan Sansthan
  • भाकृअनुप- वि.प.कृ.अनु.संस्थान, अल्मोड़ा में प्लास्टिकल्चर अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी पर

     भाकृअनुप- वि.प.कृ.अनु.संस्थान, अल्मोड़ा में  18 -19 दिसम्बर, 2018 के दौरान  दो दिवसीय अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना- प्लास्टिकल्चर अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी की चौदहवीं वार्षिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से 50 से अधिक वैज्ञानिकों सहित कृषि विशेषज्ञ, नीतिकार व प्रसार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सर्वप्रथम डा. पंकज कुमार मिश्रा, प्रधान वैज्ञानिक एवं कार्यकारी विभागाध्यक्ष, फसल उत्पादन विभाग द्वारा सभी आगुन्तकों का स्वागत किया गया। डा. आर.एस. रावल, निदेशक, गोविन्द बल्लभ पन्त राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान, कोसी कटारमल, अल्मोड़ा इस कार्यशाला के मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने पर्वतीय परिपेक्षय में कृषि के विकास हेतु प्लास्टिक की उपयोगिता पर बल दिया एवं प्लास्टिक से होने वाले वातावरणीय प्रभाव को ध्यान में रखकर आगे की रणनीति तैयार करने के लिए कहा। विशिष्ट अतिथि डा. अश्विनी कुमार एवं डा. प्रीतम चन्द्रा, भाकृअनुप संस्थानों के पूर्व निदेशकों द्वारा इस परियोजना की आधारशिला के विषय में विस्तृत जानकारी दी गयी एवं वर्तमान में कृषि उत्पादन बढ़ाने एवं जल संरक्षण हेतु प्लास्टिक की उपयोगिता को अत्यन्त आवश्यक बताया गया। उन्होंने कहा कि गत वर्ष इस परियोजना के अन्तर्गत सराहनीय कार्य किये गये। डा. आर. के. सिंह, निदेशक भाकृअनुप- केन्द्रीय कटाई उपरान्त अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, लुधियाना एवं परियोजना समन्वयक, अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना- प्लास्टिकल्चर अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी द्वारा वर्ष 2017-18 की वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कुल 14 केन्द्र इस परियोजना के अन्तर्गत कार्य कर रहे हैं।


    विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कार्यकारी निदेशक, डा. लक्ष्मी कांत ने देश के विभिन्न क्षेत्रों से आये वैज्ञानिकों का स्वागत किया एवं पर्वतीय क्षेत्रों हेतु इस परियोजना के अन्तर्गत प्लास्टिक के प्रयोग की महत्ता को बताया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय कृषि वर्षा आधारित है एवं कृषकों की आय की वृद्धि हेतु प्लास्टिक का उपयोग पॉलिटैंक एवं संरक्षित खेती हेतु अत्यन्त आवश्यक है। इस क्षेत्र के भगरतोला, दूनागिरी एवं दाड़िम गाँव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पॉलीथीन के उपयोग द्वारा यहां के किसान अपनी आय को बढ़ाने में सक्षम हुए हैं।  इस अवसर पर विभिन्न संस्थानों एवं केन्द्रों द्वारा कुल 11 तकनीकी बुलिटिन एवं प्रसार पुस्तिका एवं दो चलचित्रों का विमोचन भी किया गया।  इस कार्यशाला की संस्तुतियाँ देश व राज्य में प्लास्टिकल्चर अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी के विकास से संबंधित नीतियाँ व कार्यक्रम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी।