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  • उत्तराखण्ड के कृषकों का ‘सब्जी फसलों एवं चारा उत्पादन की उन्नत तकनीकें' पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

    भाकृअनुप.-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र, हवालबाग में बी.ए.आई.एफ. डेवलपमेंट रिसर्च फाउण्डेशन, खेतीखान, चम्पावत, उत्तराखण्ड द्वारा वित्त पोषित 'सब्जी फसलों एवं चारा उत्पादन की उन्नत तकनीकें' विषय पर 26-28 अगस्त, 2019 तक त्रि-दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में चम्पावत, उत्तराखण्ड के 9 गाँवों से 30 किसानों ने भाग लिया।प्रशिक्षण कार्यक्रम में पर्वतीय क्षेत्रों में सब्जी उत्पादन की तकनीकों, संरक्षित खेती, चारा उत्पादन, सब्जी बीजोत्पादन की सामान्य विधियाँ तथा नर्सरी प्रबन्धन की जानकारी संबंधित विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से कृषकों को बतायी गयी। इसके अलावा कृषकों को कृषि कार्यों में प्रयुक्त होने वाले छोटे कृषि यंत्रों तथा विभिन्न फसलों की मढ़ाई और गहाई हेतु संस्थान द्वारा विकसित यंत्रों के बारे में भी जानकारी प्रदान की गई। साथ ही सब्जियों में रोग-प्रबन्धन, सब्जी फसलों में समेकित कीट प्रबंधन, बीज संसाधन की सामान्य विधियाँ एवं यंत्र इत्यादि पर भी कृषकों को विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षणार्थियों को शीतकाल में चारे की उपलब्धता के बारे में विस्तार से बताया गया तथा चारा खण्ड में भ्रमण भी करवाया गया। कृषकों को बे-मौसमी सब्जी उत्पादन के बारे में विस्तार से बताया गया तथा सब्जी प्रक्षेत्र का भ्रमण भी कराया गया। संस्थान के संग्रहालय का भ्रमण करवाकर कृषकों को संस्थान द्वारा विकसित किस्मों तथा तकनीकों के बारे में अवगत करवाया गया। कृषकों को पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षभर चारा उत्पादन के लिए बहुवर्षीय घास, चारा वृक्ष तथा द्विउद्देशीय खाद्यान्न फसलों के बारे में भी जानकारी दी गयी।

    संस्थान के निदेशक डा. अरूणव पट्टनायक ने कृषकों से सब्जी फसलों, चारा फसलों एवं कृषि में वैज्ञानिक विधि को अपनाकर अपनी आय तथा फसलों की उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने संस्थान द्वारा पर्वतीय कृषि को नयी ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिये किये गये महत्वपूर्ण शोध कार्यों की जानकारी विस्तारपूर्वक दी। कार्यक्रम के अन्त में कृषकों से प्रशिक्षण तथा उनकी समस्याओं के विषय में खुला विचार-विमर्श हुआ तथा कृषकों की प्रतिक्रिया भी ली गयी। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न करने वाले कृषकों को संस्थान द्वारा प्रमाण-पत्र भी वितरित किये गये। कार्यक्रम का समन्वयन डा. अनुराधा भारतीय, डा. कुशाग्रा जोशी एवं डा. हनुमान राम द्वारा किया गया।