• विवेकानन्द संस्थान ने 97 वाँ स्थापना दिवस मनाया

    दिनांक 4 जुलाई 2020 को भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का 97वाँ स्थापना दिवस संस्थान के अल्मोड़ा एवं हवालबाग प्रक्षेत्र स्थित सभागार तथा संस्थान के कृषि विज्ञान केन्द्रों (काफलीगैर, बागेश्वर एवं चिन्यालीसौण, उत्तरकाशी) में कोविड- 19 के दिशा-निर्देशों के अन्तर्गत सामाजिक दूरी बनाते हुए डिजिटल प्लेटफार्म पर धूम-धाम से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुंदन हाउस स्थित पूजागृह में पूजा अर्चना से हुआ। सर्वप्रथम डा. एस0सी0 पाण्डेय, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा संस्थान के बारे में संक्षिप्त जानकारी देते हुए सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. तिलक राज शर्मा, उपमहानिदेशक (फसल विज्ञान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली रहे। उन्होंने  विडियो कान्फ्रैंस के माध्यम से  संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को स्थापना दिवस की बधाई दी तथा संस्थान द्वारा पर्वतीय कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु सराहना व्यक्त किया। इस अवसर पर उन्होंने  "India Need Innovation in Agricultural to sustain Food and Nutritional Security" विषय पर व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने कृषि शोध प्रणाली की क्षमता एवं कुशलता बढ़ाने हेतु मूलभूत परिवर्तनों तथा कृषि शोध में आधुनिक साधनों एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समावेश की आवश्यकता पर बल दिया। डा. शर्मा ने भाकृअनुप- भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के सहयोग से भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा में  M.Sc. & ph.D कार्यक्रम शुरू करने पर जोर दिया तथा संस्थान के निदेशक से इस संबंध में उचित कार्यवाही करने को कहा। साथ ही उन्होंने   2023 में संस्थान के शताब्दी समारोह को ध्यान में रखते हुए अभी से भावी गतिविधियों की योजना बनाने पर बल दिया ताकि संस्थान की 100वीं वर्षगांठ को यादगार बनाया जा सके। 

              

    संस्थान के निदेशक डा. लक्ष्मी कान्त ने संस्थान के संस्थापक प्रो0 बोसी सेन को नमन करते हुए विगत वर्ष में संस्थान द्वारा प्राप्त की गयी उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष में संस्थान द्वारा विकसित 4 नयी प्रजातियाँ नामतः मक्का में वी.एल. स्वीटकॉर्न-2, मसूर की वी.एल. मसूर 148, भट्ट की वी.एल. भट्ट 202, दलहनी मटर की वी.एल. मटर 61 प्रजातियाँ अधिसूचित की गयी हैं। साथ ही विभिन्न फसलों की 09 नयी प्रजातियाँ जारी की गयी हैं। इनमें मंडुवा के सफेद दानों वाली वी.एल. मंडुवा 382, रामदाना की वी.एल. चुआ 110, क्यू.पी.एम. मक्का की वी.एल. क्यू.पी.एम हाइब्रिड 59 उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा संस्थान में डबल्ड हैप्लाइड मक्का तथा लहसुन की बल्बिल द्वारा बल्ब उत्पादन पर शोध हो रहे हैं। विगत वर्ष में विकसित किए गए वी.एल. मक्का थ्रेशर के बारे में भी जानकारी दी गयी। उन्होंने बताया कि संस्थान की प्रजातियाँ देश के 24 राज्यों तथा संस्थान द्वारा बनाये गये कृषि यंत्र 16 राज्यों में फैल चुके हैं। विगत वर्षों में हेरीसीयम एवं लेंटीनुला मशरूम के उत्पादन की तकनीकी का मानकीकरण किया गया है। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा कृषक हेल्पलाइन, कृषि समृद्धि कार्यक्रम, आवश्यकता के अनुसार एस.एम.एस. सर्विस, एम. किसान सेवा तथा व्टासएैप का प्रयोग करके तकनीकी जानकारी का प्रसार लगभग चार सौ से एक लाख किसानों के मध्य किया गया। साथ ही लौट रहे प्रवासियों के लिए दस ट्रेनिंग माड्यूल विकसित किये गये हैं, जिसका विवरण संस्थान की वैबसाइट पर उपलब्ध है। विगत वर्ष में संस्थान द्वारा कई पुरस्कार भी प्राप्त किये गये हैं। जिसमें डा. लक्ष्मी कान्त द्वारा राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (एन.ए.ए.एस.) फैलोशिप,  संस्थान की टीम द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए फखरूद्दीन अली अहमद अवार्ड, कृषि विज्ञान केन्द्र, चिन्यालीसौण (उत्तरकाशी) द्वारा पंडित दीन दयाल उपाध्याय अर्वाड, डा. जितेन्द्र कुमार द्वारा पी.एच.डी. में उत्कृष्ट शोध हेतु पं. जवाहर लाल नेहरू अवार्ड तथा कदन्न फसल शोध के लिए बैस्ट सेंटर अवार्ड प्रमुख हैं। साथ ही उच्च एन.ए.ए.एस. रेटिंग तथा अन्तर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में 34 से ज्यादा शोध-पत्रा भी प्रकाशित किए गए हैं।

         

    इसके अलावा एस.सी.एस.पी., टी.एस.पी. एवं एन.ई.एच. कार्यक्रमों के माध्यम से संस्थान द्वारा उन्नत कृषि तकनीकी दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में पहुंचायी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान में ई-ऑफिस पर कार्य दिनांक 26 जून, 2020 से प्रारंभ कर दिया गया है। साथ ही उन्होंने आगामी समय में शोध प्राथमिकताओं के बारे में भी बताया।  संस्थान द्वारा इस अवसर पर संस्थान के पूर्व निदेशक नामतः डा. जे. पी. टण्डन, डा. एच. एस. गुप्ता, डा. ए. के. श्रीवास्तव, डा. जे. सी. भट्ट एवं डा. अरूणव पट्टनायक तथा सी.एस.के.-एच.पी.के.वी., पालमपुर के पूर्व कुलपति डा. एस. के. शर्मा तथा वर्तमान कुलपति डा. ए. के. सरियाल भी डिजिटल माध्यम से सम्मिलित हुए तथा उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी। रामकृष्ण कुटीर, अल्मोड़ा के अध्यक्ष स्वामी ध्रुवेशानन्द जी ने स्वामी विवेकानन्द जी की वन्दना करते हुए वैज्ञानिक कृषि को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

    इस अवसर पर उपमहानिदेशक डा. शर्मा ने संस्थान द्वारा विकसित नवीन प्रजातियों नामतः वी.एल. भट्ट 202 एवं वी.एल. स्वीटकॉर्न हाईब्रिड 2 का लोकार्पण किया गया। संस्थान में कार्यरत वैज्ञानिक डा. जे. पी. आदित्य, तकनीकी अधिकारी श्रीमती निधि सिंह एवं कुशल सहायक श्री हरीश चन्द्र उपाध्याय को उनके उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मानित किया गया। साथ ही प्रगतिशील कृषकों श्रीमती प्रीति भण्डारी, अल्मोड़ा एवं श्री जागीर सिंह, बैलपड़ाव, रामनगर को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर संस्थान के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी भौतिक/ डिजिटल माध्यम से उपस्थित रहे। स्थापना दिवस कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक डा0 रेनू जेठी द्वारा किया गया तथा धन्यवाद प्रस्ताव प्रधान वैज्ञानिक डा0 पी. के. मिश्रा द्वारा ज्ञापित किया गया। समारोह का समापन आम की दावत के साथ सम्पन्न हुआ।