• भाकृअनुप-वि0प0कृ0अनु0सं0, अल्मोड़ा की अनुसूचित जाति उपयोजना के अन्तर्गत कृषकों ने शुरू किया मशरूम उत्पादन

    भाकृअनुप- विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा द्वारा संचालित अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत जनपद बागेश्वर के अंगीकृत ग्रामों उडेरखानी एवं लोब में 22 कृशकों द्वारा मशरूम उत्पादन का कार्य किया जा रहा है। मशरूम उत्पादन के तकनीकी ज्ञान को निर्बल वर्ग के कृषकों तक पहुँचाने हेतु सर्वप्रथम चयनित कृषकों को कृषि विज्ञान केन्द्र, काफलीगैर में दो एक दिवसीय प्रशिक्षण दिये गये जिसमें भाकृअनुप-वि0प0कृ0अनु0सं0 के वैज्ञानिकों व कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञों ने मशरूम उत्पादन तकनीकी की बारीकियों को प्रयोगात्मक रूप से कृषकों को बताया।दिसम्बर माह में चयनित कृषकों को भाकृअनुप-वि0प0कृ0अनु0सं0, प्रक्षेत्र हवालबाग से 50कु0 बटन मशरूम की पाश्चुरीकृत खाद, स्पाॅन व अन्य सामग्री उपलब्ध कराई गई तथा अपनी देख-रेख में बीजाई एवं केसिंग का कार्य करवाया गया जिसके परिणाम स्वरूप मशरूम का उत्पादन अब भली प्रकार  प्रारम्भ हो गया है। चूँकि यह कृषक पहली बार मशरूम उत्पादन का कार्य कर रहे हैं अतः वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों द्वारा निरन्तर निगरानी व सलाह का कार्य किया जा रहा है। इसके लिये सम्बन्धित गाँवों की मशरूम उत्पादन इकाईयों का भ्रमण कर सलाह व निदान प्रदान करने के साथ-साथ सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सअप का भी उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 2.0 कुन्तल मशरूम का उत्पादन इन कृषकों द्वारा किया जा चुका है, जिसका बाजार भाव रू0 200/किग्रा0 स्थानीय बाजार में मिल रहा है। अभी 8.0कु0 के लगभग और मशरूम उत्पादन की क्षमता उत्पादन इकाईयों में है। मशरूम उत्पादन से उत्साहित कृषकों ने भविष्य में ढिंगरी मशरूम के उत्पादन की योजना भी बनाई है। मशरूम उत्पादन करने वाले कृषकों में प्रमुख मशरूम उत्पादक श्री महिपाल टम्टा, नन्दन प्रसाद, सुरेश चन्द्र, मोहन लाल, नारायणी देवी तथा पार्वती देवी (लोब व उडेरखानी) का कहना है कि मशरूम आय संवर्धन का एक अच्छा उपाय है क्योंकि इन्हें जंगली जानवरों के जोखिम व मौसम की बेरूखी के दौरान भी उत्पादित किया जा सकता है हालांकि इसके लिये तकनीकी जानकारी होना बहुत आवश्यक है। वर्तमान में पहली बार मशरूम उत्पादन कर रहे कम आय वर्ग के अनुसूचित जाति के कृषक बहुत उत्साहित हैं और भविष्य में मशरूम का अचार बनाकर अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं।