ऐतिहासिक पृष्ठभूमि/परिदृश्य

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पद्मभूषण स्व0 प्रो0 बोसी सेन - संस्थापक
संदेश - प्रगति की ओर अग्रसर रहो

संस्थान की स्थापना जुलाई 1924 को पदमभूषण स्व० प्रो० बोसी सेन द्वारा कोलकाता (पूर्व नाम कलकत्ता) में की गयी तथा इसका नाम विवेकानन्द लेबोरेटरी रखा गया। लेबोरेटरी को 1936 में स्थायी रुप से अल्मोड़ा स्थानान्तरित किया गया तथा 1959 में उत्तरप्रदेश सरकार को हस्तान्तरित करने तक  शुभ चिंतकोंद्वारा दिये गये दान एवं मदद द्वारा इसे संचालित किया गया। 1 अक्टूबर 1974 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा इस संस्थान को अपने अन्तर्गत ले लिया एवं इसका नाम विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान हो गया।

संस्थान के विकास में महत्पूर्ण मील के पत्थर

  • 1924 - कलकत्ता में एक  छोटे कमरे में प्रयोगशाला स्थापित की गई - एक व्यक्ति प्रयोगशाला।
  • 1936 - प्रयोगशाला  को अल्मोड़ा के कुन्दन हाउस में स्थायी रुप से स्थानान्तरित किया गया ।
  • 1943 - शोध प्राथमिकतामौलिक शरीर क्रिया विज्ञान के स्थान पर कृषि में परिवर्तित की गयी।
  • 1952 - हवालबाग में 15 एकड़ भूमि आवंटन ।
  • 1959 - प्रयोगशाला उत्तरप्रदेश सरकार को स्थानान्तरित की गयी तथा 215 एकड़ भूमि का आवंटन ।
  • 1986 - संभागों एवं अनुभागों का सृजन।
  • 2001 - सरदार पटेल उत्कृष्ट भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पुरस्कार वर्ष 2000 में प्राप्त किया ।
  • 2004 - ‘‘उत्तर पश्चिमी पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता में वृद्धि के लिए उन्नत तकनीकें‘‘ नामक प्रकाशन को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रतिष्ठित डाॅ. राजेंद्र  प्रसाद पुरस्कार प्रदान किया गया। 
  • 2006 - मंडुवा/मादिरा के दाना निकालने और गहाई के लिए बनाए गए विवेक थ्रेसर-1 ने वर्ष 2006 में राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एनआरडीसी), नई दिल्ली द्वारा संस्थापित एनआरडीसी का मेरिटोरियस इंवेशन अवार्ड प्राप्त किया और इस अविष्कार के लिए संस्स्थान के वैज्ञानिकों ने भाकृअनुप का हरि ओम आश्रम ट्रस्ट अवार्ड, 2007 प्राप्त किया।
  • 2008 - सरदार पटेल भारतीय कृषि अनुसंधान सम्मान पुरस्कार वर्ष 2007 में प्राप्त किया।
  • 2009 - संस्थान के वैज्ञानिकों ने ‘उत्तर पश्चिम हिमालय में व्हाइट ग्रब के प्रबंधन के लिए पर्यावरण अनुकूल अभिनव प्रौद्योगिकी‘ के विकास पर 2009 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) का गोल्ड मेडल प्राप्त किया जिसे वर्ष 2008 का सर्वश्रेष्ठ अविष्कार के रूप में पहचाना गया। इस कार्य ने वर्ष 2008 में एनआरडीसी का सोसाइटल इन्नोवेशन अवार्ड भी प्राप्त किया। 
  • 2010 - संस्थान के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के विषय क्षेत्र में आईसीएआर आउटस्टेंडिंग टीम रिसर्च अवार्ड भी प्राप्त किया। 
  • 2012 - संस्थान ने कृषि प्रौद्योगिकियों के विकास और किसानों के बीच उन्हें लोकप्रिय बनाने में उल्लेखनीय योगदान के लिए महिंद्रा कृषि समृद्धि इंडिया एग्रि अवार्ड प्राप्त किया।
  • 2017 - संस्थान को 11 फरवरी, 2017 को आईएसजीपीबी के प्लेटिनम जुबिली समारोह के दौरान मक्का की लैंडमार्क किस्मों (वीएल मक्का 54 और एचआईएम 128) तथा गेहूं (वीएल गेहूं 421) को विकसित करने के लिए सम्मानित किया गया।
  • 2017 - संस्थान को वर्ष 2017-18 में स्माल मिलेट (कदन्न) अनुसंधान के लिएसर्वोत्तम निष्पादन केंद्र अवार्डदेने की घोषणा की गई।
  • 2019 - भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के 91वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर  संस्थान के कृषि विज्ञान केन्द्र, चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी), उत्तराखण्ड को पं दीन दयाल उपाध्याय क्षेत्रीय कृषि विज्ञान प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त हुआ।
  • 2019 - भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के 91वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर संस्थान को जनजातीय कृषि पद्धतियों में उत्कृष्ट शोध हेतु फखरूद्दीन अली अहमद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। 

 

पृष्ठ आखरी अपडेट : 14-05-2020