कृषि मशीनों एवं उपकरणों के मरम्मत एवं रख रखाव पर व्यक्तिगत प्रशिक्षण

भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा दिनांक 21 से 30 जुलाई, 2022 के दौरान ‘कृषि मशीनों एवं उपकरणों के मरम्मत एवं रखरखाव पर व्यक्तिगत प्रशिक्षण’ विषय पर दस-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल एवं पौड़ी गढ़वाल के 16 युवा किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के उदघाटन सत्र में विभागाध्यक्ष फसल उत्पादन विभाग डॉ जयदीप कुमार बिष्ट ने प्रशिक्षणार्थियों को इस कार्यक्रम के दौरान उपलब्ध संस्थान के स्त्रोतों, मशीनों एवं वैज्ञानिकों तथा तकनीकी कर्मचारियों के अनुभवों का अधिकाधिक उपयोग अपने कौशलवर्धन में करने पर बल दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत में प्रशिक्षणार्थियों को यन्त्रावली में उपयोग काम में आने वाले विभिन्न औजारों, उपकरणों एवं विभिन्न धातुओं के बारे में जानकारी दी गई तथा यन्त्रावली में कार्य के दौरान पहने जाने वाले सुरक्षा कवचों एवं सावधानियों के बारे में बताया गया। इसके बाद दो दिन प्रशिक्षणार्थियों को हस्त चालित एवं विद्युत चालित औजारों एवं मशीनों के संचालन पर व्यक्तिगत प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने धातु काटना, ड्रिल करना एवं किनारों को समतल करना सीखा। चौथे दिवस प्रशिक्षणार्थियों को पोर्टेबल पॉलीहाउस को खोलने, स्थानान्तरित करने एवं पॉलीफिल्म लगाने पर प्र्रशिक्षण दिया गया। इसके पश्चात प्रशिक्षणार्थियों ने पॉलीटैंक निर्माण के लिए तकनीकी विशेषताओं के बारे में सीखा एवं पॉलीटैंक की मरम्मत का कार्य किया। रविवार दिनांक 24 जुलाई को सभी प्रशिक्षणार्थियों को हल्द्वानी एवं रूद्रपुर स्थित औद्योेगिक इकाईयों का भ्रमण कराया गया जिससे कि वे कृषि यंत्रों के निर्माण सम्बन्धित कार्यप्रणालियों को देख सकें। साथ ही प्रशिक्षणार्थियों को बाहर के बाजार में कलपुर्जो एवं निर्माण सामग्री मिलने वाली दुकानों का भ्रमण करवाया गया ताकि वे अपने गॉव में मरम्मत कार्य शुरू करने पर इन बाजारों से आवश्यक सामग्री खरीद सकें। तत्पश्चात एक दिवस के लिए  प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न वेल्डिंग विधियों, वेल्डिंग के दौरान उपयोग में लाई जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी गयी एवं वेल्डिंग करना सिखाया गया। यऩ्त्रावली में होने वाली सभी क्रियाओं के बारे में सिखने के बाद आखिरी 2 दिन  संस्थान में उपलब्ध एवं पहाड़ी क्षेत्रों में उपयोग होने वाली कृषि मशीनों, जैसे पावर टिलर एवं उसके साथ लगने वाले उपकरण, वी एल मंडुआ/मादिरा थ्रेशर, वी एल धान मड़ाई यन्त्र, वी एल मक्का शैलर, बुवाई के यंत्रो के मरम्मत एवं रखरखाव पर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया एवं सभी प्रशिक्षणार्थियों इन यंत्रों को खोलकर इनके पुर्जों की मरम्मत की एवं सुचारू रूप से चलाया। दिनांक 30 जुलाई को प्रशिक्षण के समापन समारोह में संस्थान के निदेशक डॉ लक्ष्मी कान्त ने प्रशिक्षणार्थियों को इस दस दिवसीय कार्यक्रम द्वारा प्राप्त कौशल एवं अनुभवों का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि यन्त्रों के मरम्मत कार्य एवं स्वरोजगार उत्पन्न करने के लिए प्रेरित एवं उत्साहित किया जिसके फलस्वरूप एक तरफ गाँव के स्तर पर कृषि यंत्रो की त्वरित मरम्मत हो सकें तथा दूसरी तरफ इन युवाओं का जीविकोपार्जन भी हो सकें। इस दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयन डॉ श्याम नाथ एवं ई॰ हितेश बिजारणिया द्वारा किया गया।