भाकृअनुप- विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा गेहूँ की एक नयी प्रजाति वी0 एल0 2041 विकसित

भाकृअनुप- विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा गेहूँ की एक नयी प्रजाति वी0 एल0 2041 विकसित की गयी है जो कि बिस्किट बनाने के लिए अत्यधिक उपयुक्त है। इस प्रजाति की पहचान 61वीं अखिल भारतीय गेहूँ एवं जौ शोधकर्ताओं की वार्षिक बैठक जो कि दिनांक 29-31 अगस्त, 2022 को राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में आयोजित हुई, के दौरान प्रजाति पहचान समिति द्वारा की गयी। उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के राज्यों (उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, जम्मू एवं कश्मीर तथा मणिपुर) में विगत 03 वर्षों में हुये कुल 24 वर्षाश्रित एवं 05 सिंचित अखिल भारतीय परीक्षणों में इस प्रजाति की बिस्किट क्वालिटी (फैलाव गुणांक) 11.07 आया है, जो कि पूरे देश में सर्वाधिक है। साथ ही इस प्रजाति में औसतन 09.07 प्रतिशत प्रोटीन तथा इसका दाना (दाना कठोरता सूचकांक 22.6) मुलायम है। ये सभी गुण इस प्रजाति को बिस्कुट बनाने हेतु अभी तक की सबसे उपयुक्त प्रजाति बनाते हैं। इस प्रजाति ने अखिल भारतीय परीक्षणों में उपराऊँ दशा में तीन वर्षों में औसत उपज 29.06 कु./है. तथा सिंचित दशा में 49.08कु./है. दर्शायी है, जो कि वर्तमान प्रचलित किस्मों नामतः एच0 एस0 507, वी0एल0 गेहूँ 907 एवं एच0पी0डब्ल्यू 349 से क्रमशः 2.02, 5.08, 2.01 एवं  5.51, 4.84 और 4.4 प्रतिशत अधिक है। साथ ही यह प्रजाति गेहूं की फसल में लगने वाली नयी बीमारी गेहूँ का ब्लास्ट रोग के लिए भी मध्यम रूप से प्रतिरोधी है। यह प्रजाति भूरा तथा पीला रतुआ रोग हेतु प्रतिरोधी है। आशा है कि यह प्रजाति बिस्कुट बनाने वाली कम्पनियों के लिए लाभप्रद सिद्ध होगी तथा किसानों को भी इसकी उपज का अच्छा दाम मिलने की संभावना है।