भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा पारम्परिक प्रजातियों को संरक्षित करने की मुहिम के तहत पारम्परिक कृषक प्रजाति च्वार धान पंजीकृत

च्वार धान सिंचित एवं असिंचित दोनों ही अवस्थाओं के अनुकूल धान की एक कृषक प्रजाति है जो कि उत्तरकाशी जिले में खलाड़ी स्थानीय निकास/पंचायत के अन्तर्गत आने वाले गॉंव गोदी, पुरोला के कृषकों द्वारा इसकी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता, पौष्टिकता एवं औषधीय गुणों के कारण अनेक वर्षो से संरक्षित की गयी है तथा पुरोला एवं मोरी क्षेत्र में विस्तृत रूप में उगायी जाती है। लाल रंग के दानों वाली इस प्रजाति की मॉंग स्थानीय बाजारों में तथा समीवर्ती राज्यों में रहती है। कृषि विज्ञान केन्द्र, चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी की पहल तथा डा. लक्ष्मी कांत, निदेशक, भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के मार्गदर्शन के फलस्वरूप वर्ष 2015 में च्वार धान का बीज इस संस्थान मेें उपलब्ध कराया गया था। तत्पश्चात् इस कृषक प्रजाति का संस्थान में प्रारम्भिक मूल्यांकन किया गया तथा इस प्रजाति को पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली भेजा गया। प्राधिकरण द्वारा संचालित डी0यू0स0 परीक्षणों में सफलता के पश्चात् इस वर्ष 2022 में धान की कृषक प्रजाति च्वार धान प्राधिकरण द्वारा पंजीकृत कर ली गयी है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा उत्तराखण्ड रत्न अवार्ड एवं आत्मा परियोजना किसान सम्मान अवार्ड प्राप्त प्रगतिशील कृषक श्री युद्धवीर सिंह रावत, ग्राम-खलाड़ी, पुरोला के च्वार धान के संरक्षणकर्ता कृषकों द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति है। प्राधिकरण के प्रावधानों के अन्तर्गत संरक्षित च्वार धान के संरक्षणकर्ता कृषक समूह भविष्य में कई प्रकार के लाभ प्राप्त कर सकते हैै जैसे केवल संरक्षणकर्ता कृषकों को पंजीकृत कृषक प्रजाति के उत्पादन एवं विपणन करने का विशेष अधिकार, कृषि विविधता के संरक्षण एवं विकास में योगदान हेतु पुरस्कार या मान्यता साथ ही अगर यह प्रजाति किसी नई किस्म के विकास करने में प्रयोग में आती है, तो कृषकों को नई किस्म द्वारा अर्जित लाभों में लाभ साझा करने का अधिकार भी प्राप्त होता है। संरक्षित प्रजाति के कृषक किसी भी अन्य वाणिज्यिक प्रजनक द्वारा अघोषित उपयोग किये जाने पर भी मुआवजे की हकदार होते है। इस कृषक प्रजाति को संरक्षित करने में कृषि विज्ञान केन्द्र, चिन्यालीसौंण, उत्तरकाशी में कार्यरत डॉ. वी.के. सचान (सेवानिवृत्त प्रभारी), विषय वस्तु विशेषज्ञ श्री गौरव पपनै, श्री पंकज नौटियाल, श्रीमती मनीषा आर्या ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। साथ ही वरिष्ठ वैज्ञानिक डा0 अनुराधा भारतीय एवं डा0. जय प्रकाश आदित्य (धान प्रजनक) विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा नेे च्वार धान के प्रारम्भिक मूल्यॉंकन एवं पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण नई दिल्ली के अन्तर्गत पंजीकरण की प्रारम्भिक प्रक्रिया में अपना योगदान दिया है। भविष्य में भी अन्य कृषक समुदाय अपने स्थानीय किस्में के संरक्षण हेतु निदेशक महोदय, विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा से सम्पर्क कर सकते है एवं पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के अन्तर्गत प्रावधानों के लाभ ले सकते है।