• पर्वतीय क्षेत्रों में आय सृजन हेतु पारंपरिक फसलों की उन्नत उत्पादन प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन तकनीकी पर 6 दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम

    भाकृअनुप-वि.प.कृ.अनु.सं, अल्मोड़ा में यूएन एनवायरमेन्ट, जी0ई0एफ0, परियोजना के अंतर्गत पर्वतीय क्षेत्रों में आय सृजन हेतु परंपरागत फसलों की उन्नत उत्पादन प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन तकनीकी पर ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छः दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक डा0 लक्ष्मी कांत ने किया। उन्होंने कृषकों को कृषि जैव विविधिता को संरक्षित करने तथा उन्हें मुख्य धारा में लाने हेतु पारंपरिक फसलों का उन्नत उत्पादन, उन्नत प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन करने हेतु प्रेरित किया तथा साथ ही कृषकों को बौद्विक संपदा अधिकारों पर जानकारी दी। कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों हेतु कूट एवं कदन्न फसलोत्पादन, धान एवं दलहन उत्पादन तकनीकी एवं परंपरागत फसलों के बीज उत्पादन द्वारा आय वृद्वि एवं सामुदायिक बीज बैंक पर व्याख्यान आयोजित किए गए। साथ ही फसल रोग एवं कीट प्रबंधन पर  कृषकों की समस्याओं का निराकरण किया गया ।पारंपरिक फसलों की मूल्य श्रृँखला में किसानों की भूमिका सशक्त करने के उद्देश्य से कृषकों को पारंपरिक फसलों के प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन जैसे सोयाबीन से टोफू (पनीर) एवं सोया मिल्क, मंडुवे के बिस्कुट, क्रिस्पीज एवं पापड़ बनाने एवं विपणन रणनीति पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। कृषकों को वॉकल फॉर लोकल की तर्ज पर स्थानीय जैव विविधता संसाधनों के संरक्षण एवं मूल्यवर्धन द्वारा प्रोत्साहन के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही ‘देखकर सीखने‘ के आधार पर कृषकों को जैविक बोर्ड मजखाली, जे.आई.सी.ए. आउटलेट, रानीखेत एवं आजीविका खाद्य प्रसंस्करण इकाई, हवालबाग के भ्रमण भी आयोजित किए गए। संस्थान के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र में परियोजना के अंतर्गत पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त परंपरागत फसलों की प्रजातियों के ट्रायल का भी कृषकों ने अवलोकन किया तथा अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में टिहरी गढ़वाल, अल्मोड़ा तथा चमोली जिले के 113 किसानों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संयोजन डा0 अनुराधा  भारतीय, कुशाग्रा जोशी, जितेंद्र कुमार तथा जे पी आदित्य ने किया।