• हिमालय दिवस पर पर्वतीय कृषि की मुख्य समस्याओं और नये उभरते आयामों विषय पर मुख्य व्याख्यान का आयोजन

    भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा भारत की आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अन्तर्गत आज दिनांक 9 सितम्बर को हिमालय दिवस के अवसर पर पर्वतीय कृषि की मुख्य समस्याओं और नये उभरते आयामों विषय पर मुख्य व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ0 विजय पाल शर्मा, प्रो0 भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद तथा भूतपूर्व अध्यक्ष, कृषि लागत और मूल्य आयोग, भारत सरकार ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डाॅ0 डी0के0 यादव, सहायक महानिदेशक (बीज), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता डाॅ0 शर्मा ने अपने व्याख्यान के दौरान पर्वतीय कृषि की मूलभूत समस्याओं जैसे कि जलवायु परिर्वतन, प्राकतिक आपदाओं, कम जोत वाली भूमि और बाजारों की अनुउपलब्धता पर चर्चा की। उन्होनें कृषकों के पारम्परिक ज्ञान का उपयोग करते हुए जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकियाँ इजाद करने पर विशेष जोर दिया। उन्होनें पर्वतीय क्षेत्रों की पारम्परिक फसलों व फलों जैसे की मोटा अनाज, सी-बक्र्थोन, केसर और काला जीरा के उत्पादन व मूल्यवर्धन पर विशेष ध्यान केन्द्रित करने को कहा। इसके साथ ही पर्वतीय कृषि को लाभदायक बनाने के लिए जैविक शहद उत्पादन, कृषि पर्यटन और शीतजल मत्स्य उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केन्द्रित करने को कहा। संस्थान के निदेशक डाॅ0 लक्ष्मी कान्त ने बताया कि पर्वतीय कृषक अपने क्षेत्र में पर्वतीय कृषि की इन विभिन्न विधाओं को अपनाकर अपनी आय दोगुनी कर सकते है। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न भागों से 140 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 बी0एम0 पाण्डेय, डाॅ0 दिनेश चन्द्र जोशी व डाॅ0 रेनू जेठी ने किया।