• वैश्विक पर्यावरण सुविधा परियोजना द्वारा परंपरागत फसलों के संरक्षण की मुहिम

    भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संसथान, अल्मोड़ा द्वारा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम-वैश्विक पर्यावरण सुविधा परियोजना के अंतर्गत पर्वतीय कृषकों को परंपरागत फसलों के संरक्षण एवं मुख्य धारा में लाने हेतु ग्राम गल्लीबस्युरा में प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। विवेकानंद संस्थान तथा परियोजना सहयोगी संस्था, लोक चेतन मंच, रानीखेत द्वारा ग्राम गल्लीबस्युरा में खरीफ की परंपरागत फसलों की विभिन्न किस्मों जैसे मंडुआ (42 किस्मों), धान (45 किस्मों), गहत (24 किस्मों), चुआ (18 किस्मों), उगल (12 किस्मों) एवं भट (18 किस्मों) के मातृ परीक्षण लगाए गए थे। इन परीक्षणों का उद्देश्य कृषकों द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों की विलुप्त हो रही परंपरागत फसल विविधता को संरक्षित करना तथा उपयुक्त परंपरागत प्रजातियों का चयन था ताकि पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त प्रजातियों को  वृहद रूप में उगाकर कृषक अपनी आय का जरिया बना सकें। पर्वतीय क्षेत्रों में परंपरागत फसलों के प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन से रोजगार सृजन की आपार संभावनाएँ हैं। कृषकों ने सभी परीक्षणों का अवलोकन करने के पश्चात विभिन्न प्रजातियों के प्रति अपने अनुभव बताये तथा पारंपरिक प्रजातियों के प्रदर्शन, रोग एवं कीट प्रतिरोधकता, अजैविक तनावों के प्रति सहिष्णुता के आधार पर उपयुक्त प्रजातियों का चुनाव किया। वैज्ञानिकों ने किसानों को फसलों के मातृ परिक्षण के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने किसानों को अवगत कराया कि उन्नत प्रजातियों के साथ परंपरागत फसलों को संरक्षित करना भी आवश्यक है, क्योंकि प्रायः परंपरागत फसलें प्रतिकूल जलवायु में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं तथा साथ ही कदन्न तथा दलहन के उच्च पोषकीय गुण होने के कारण इनकी खेती पोषण सुरक्षा हेतु बहुत महत्वपूर्ण है। वर्ष २०२३ को अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष घोषित किया गया है तथा ये सुअवसर है कि कृषक कदन्न एवं अल्पदोहित अनाज की खेती करके लाभ कमा सकते हैं। गल्लीबस्युरा ग्राम के सामुदायिक बीज बैंक प्रबंधक श्री भूपेन्द्र जोशी एवं महिला किसान श्रीमती सुनीता देवी, नंदी देवी, हेमा देवी, गोविंदी देवी तथा जयदेव गिरी, योगेश जोशी ने बढ़-चढ़ कर परंपरागत किस्मों के चयन में भागीदारी की। कार्यक्रम का संयोजन डा० अनुराधा भारतीय, कुशाग्रा जोशी, जितेंद्र कुमार तथा लोक चेतना मंच से श्री पंकज सिंह चौहान ने किया।