• भाकृअनुप- विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के प्रक्षेत्र हवालबाग में किसान वैज्ञानिक संवाद का आयोजन

    दिनांक 28 सितम्बर, 2021 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद- विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के प्रक्षेत्र हवालबाग में किसान-वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान माननीय प्रधानमंत्री जी ने देश की 35 विशिष्ट फसल किस्मों एवं राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर छत्तीसगढ़ को राष्ट्र को समर्पित किया। प्रधानमंत्री जी ने देश के विभिन्न क्षेत्रों से संबद्ध कृषकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय कृषि वैज्ञानिक कृषि है वैज्ञानिकों एवं किसानों के तालमेल का बढ़ते रहना कृषि की उन्नति हेतु आवश्यक है। उन्होनें कहा कि आज किसानों के लिए अलग अलग फसलों की 35 नई प्रजातियां जारी की गई हैं। साथ ही साथ रायपुर में राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, का लोकार्पण हुआ है। इसके लिए सभी कृषि वैज्ञानिक बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षो में 1300 से भी अधिक बीज प्रजाति का विकास किया गया है। ये बीज खेती की सुरक्षा करने एवं कुपोषण को दुर करने में सहायक हैं। सभा को संबोधित करते हुए उन्होनें कहा कि बदलते मौसम को ध्यान में रखकर मौसम के अनुकुल नये बीजों का विकास करना होगा। उन्होनें आशा व्यक्त की कि राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान से विकसित तकनीकी देश की वृद्धि एवं किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी। हाल में ही कृषि वैज्ञानिकों ने टिडृडी दल के हमले को रोकने में अहम भूमिका निभाई। उन्होनें बताया कि विभिन्न चरणों में किसानों को 11 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए गये जिसका उपयोग कर किसान संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग कर अपनी मृदा की उर्वरता शक्ति बढ़ा सकते हैं। पानी की सुरक्षा हेतु माइक्रो स्प्रिकलर, फसलों को रागों से बचाने हेतु रोगरोधी नई प्रजातियों के बीज दिये गये। न्यूनतम समर्थन मूल्य की बढ़ोत्तरी के साथ खरीद प्रक्रिया में सुधार किया गया। किसानों की मदद के लिए बैकों से लोन की प्रक्रिया को आसान बनाया गया। किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ा गया। वर्तमान में देश आजादी का 75 वां अम्त महोत्सव मना रहा है एवं 25 वर्षो बाद देश आजादी का शताब्दी मनायेगा। बीज से बाजार तक की रणनीति बड़ी आर्थिक ताकत के रूप में देश में सुधार लायेगा। उन्होनें कहा कि जलवायु परिवर्तन एक चुनौती है नये प्रकार के कीट, बीमारियां फसलों को प्रभावित कर रही हैं इस पर साथ मिल कर कार्य करने की आवश्यकता है। अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष 2023 के लिए भारत को अभी से तैयारी करनी पड़ेगी। खेती में ड्रोन तकनीकी का समावेश करना होगा एवं कृषि से जुड़ी तकनीकियों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना होगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री जी द्वारा 5 प्रगतिशील किसानों से संबाद भी किया गया एवं चार विश्वविद्यालयों को हरित परिषद् पुरस्कार प्रदान किया गया। 
    इस अवसर पर संस्थान द्वारा किसान-वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डा0 लक्ष्मी कांत ने किया। इस संवाद में संस्थान के वैज्ञानिकों एवं 105 कृषक उपस्थित रहे। कृषकों को संस्थान के विभिन्न तकनीकों के विषय में जानकारी दी गई। कार्यक्रम का समन्वयन डा. बी एम पाण्डेय, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा किया गया।
     

     

       

    Under the event of Hon’ble PM Programme, a farmers’-Scientists Interaction was organized at ICAR- VPKAS Experimental Farm, Hawalbagh, Almora on 28 September, 2021 as well as virtual programme of Hon’ble PM has been displayed. During this program, Hon'ble Prime Minister dedicated 35 specific crop varieties of the country and National Institute of Biological Stress Management (NIBSM), Raipur Chhattisgarh to the Nation. The Prime Minister, said to the farmers belonging to different regions of the country that Indian agriculture is scientific agriculture and today 35 new varieties of different crops have been released to the farmers. Simultaneously, the NIBSM, has been inaugurated in Raipur and for this all agricultural scientists deserve congratulations. He said that in recent years more than 1300 seed varieties have been developed. These seeds are helpful in protecting agriculture and eradicating malnutrition. Addressing the gathering, he said that keeping in mind the changing season, new seeds will have to be developed according to the season. He expressed hope that the technology developed from the NIBSM would help in the growth of the country and increase the income of the farmers. Recently, agricultural scientists played an important role in stopping the locust attack. He informed that in different phases 11crore Soil Health Cards were given to the farmers, using which farmers can increase the fertility of their soil by using balanced quantity of manure. Micro sprinkler for water conservation, seeds of new disease resistant species were given to protect crops from diseases. The procurement process was improved with the increase in the Minimum Support Price. To help the farmers, the process of loan from banks was made easy. Farmers were linked with Kisan Credit Card. At present, the country is celebrating the 75th Anniversary of Independence and after 25 years, the country will celebrate the centenary of independence. The strategy from seed to market will bring reforms in the country as a major economic power. He said that climate change is a challenge, new types of pests, diseases are affecting the crops, there is a need to work together on this and India will have to prepare from now for the International meet year 2023. He stressed that Drone technology will have to be included in agriculture and technologies related to agriculture will have to be made a part of the curriculum. On this occasion, Prime Minister interacted with 5 progressive farmers and four Universities were given Green Council awards. On this occasion, a Farmer-Scientist dialogue has been organized by the institute, which has been presided over by Dr. Lakshmi Kant, Director, ICAR- VPKAS. Institute Scientists and 105 farmers were present in this dialogue. The farmers were informed about the various techniques of the institute. The program was coordinated by Dr. BM Pandey, Principal Scientist, ICAR-VPKAS.